पूजन

पूजा का सीधा और सरल अर्थ है सम्मान करना, सादर स्वागत करना, आराधना करना, अर्चना करना और आदर पूर्वक भेंट चढ़ाना |

यहाँ पर मैं पूजन/यज्ञ/अनुष्ठान के प्रभावों के बारे में इस लिए कुछ नहीं कहना चाहूंगा क्योंकि ये सभी को ज्ञात हैं कि पूजन, यज्ञ और अनुष्ठान सहायक सिद्ध होते हैं जीवन में लक्षयों को प्राप्त करने के लिए |

मैं कई बार लोगों से मिलता हूँ और वो कहते हैं की वह बहुत पूजन करते हैं फिर भी उनके जीवन में दुःख हैं, मैं इस बात को क्लियर करना चाहता हूँ कि पूजन करना आपका नित्य कर्म है और यह हर एक व्यक्ति करता है लेकिन जब आप किसी समस्या का उपचार करना चाहते हैं तो आपको ज्योतिष के अनुसार पूजन या यज्ञ कराना चाहिए | जैसे राजा दशरथ ने संतान प्राप्ति के लिए यज्ञ कराया था. क्या वो नित्य पूजन नहीं करते होंगे ? सबसे पहले आइये जानते हैं कि पूजन किस प्रकार के ब्राह्मण से कराना चाहिए |

पूजन कैसे ब्राह्मण से कराना चाहिए?

  • जो वेदों की पूर्ण जानकारी रखता हो |
  • जो प्रतिदिन संध्या वंदन करता हो |
  • जो पूजन से पहले संकल्प और पूजन के बाद श्रयोदान करता हो |
  • जिसने कभी श्राद्ध में भोजन न किया हो |
  • जो ज्योतिषी के निर्देशों का पालन कर सके क्योंकि ज्योतिषी का कार्य पूजन करना नहीं बल्कि निर्देश देना होता हैं |

आप अगर कोई भी पूजन या यज्ञ करते हैं तो इन नियमों का पालन करें |

यदि आप किसी उद्देश्य की प्राप्ति के लिए कोई यज्ञ या पूजन करा रहें हैं, तो हमसे एक बार सलाह अवश्य लें. हम आपके ब्राह्मण को GUIDE करेंगें ताकि आपको बेहतर रिजल्ट मिल सकें |

कई बार घरेलु पूजन में भी हमसे त्रुटि हो जाती है जैसे भगवान गणेश को तुलसी नहीं चढ़ानी चाहिए इत्यादि | ऐसी गलतियों से बचने के लिए और घर के पूजन नियम को समझने के लिए आप हमसे ( +91 7699123456 10:00AM - 5:00PM ) पर संपर्क कर सकते हैं जोकि पूर्णतयः फ्री(मुफ्त) है |

याद रखें किसी भी लक्ष्य में ईश्वरीय सहायता प्राप्त करने के लिए पूजन एवं यज्ञ ही एक मात्र विकल्प है | अगर आप कोई पूजन हमारे यहाँ कराते हैं तो आप उसे Skype पर लाइव देख सकते हैं हम आपके यहाँ ब्राह्मण भेज सकते हैं (Extra Chagrs Appl.) और आप यहाँ आकर भी करा सकते हैं जैसी आपकी इच्छा | तो फिर नीचे दी गयी लिस्ट, चित्र , वीडियो का आनंद लें और अपने विचार अवश्य दें |

एक सामान्य (अति सामान्य) पूजा की सामग्री :-

ब्राह्मण वरण, धूप बत्ती (अगरबत्ती), कपूर, केसर, चंदन, यज्ञोपवीत 5, कुंकु, चावल, अबीर, गुलाल, अभ्रक, हल्दी, आभूषण, नाड़ा, रुई, रोली, सिंदूर, सुपारी, पान के पत्ते, पुष्पमाला, कमलगट्टे, सप्तधान्य, कुशा व दूर्वा, पंच मेवा, गंगाजल, शहद (मधु), शकर, घृत (शुद्ध घी), दही, दूध, ऋतुफल, नैवेद्य या मिष्ठान्न , इलायची (छोटी), लौंग मौली, इत्र की शीशी, सिंहासन (चौकी, आसन), पंच पल्लव, (बड़, गूलर, पीपल, आम और पाकर के पत्ते), पंचामृत, तुलसी दल, केले के पत्ते, देवमूर्ति, वस्त्र, तेल, जल कलश (तांबे या मिट्टी का), सफेद कपड़ा (आधा मीटर), लाल कपड़ा (आधा मीटर), पंच रत्न (सामर्थ्य अनुसार), दीपक, बन्दनवार, ताम्बूल (लौंग लगा पान का बीड़ा), श्रीफल (नारियल), धान्य (चावल, गेहूँ), पुष्प (गुलाब एवं लाल कमल), एक नई थैली में हल्दी की गाँठ व दूर्वा आदि, अर्घ्य पात्र सहित अन्य सभी पात्र.

अगर आप कोई भी पूजन/यज्ञ/अनुष्ठान करा रहें हैं या आगे करने की प्लानिंग रखते हैं और हमसे Free में जानकारी चाहते हैं तो इस Form को भरें | आपको एक कोड(Ref. No.) आपकी Email पर भेजा जायेगा जो ऊपर दिए नंबर पर कॉल करने के दौरान आपको confirm करना होगा |

पूजन

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